Sunday, 17 November 2013
Monday, 22 July 2013
किस्मत ही नहीं साहस भी..
श्रीलंका के खिलाफ ट्राई सिरीज़ के फाईनल में टीम इंडिया को 1 ओवर में 15 रन की दरकार थी ,1 विकेट बाकी था और क्रीज़ पर मौजूद थे महेंन्द्र सिंह धोनी और फिर...फिर क्या धोनी नें यह रन केवल 4 गेंदो पर ही बना दिए और दिला दी भारत को एक और यादगार जीत. ये है धोनी को दम ..
आज जब भी कोई अच्छी किस्मत की बात करता है तो पहला नाम उसकी ज़ुबां पर महेंन्द्र सिंह धोनी का ही आता है.आए भी क्यों ना ,धोनी ने भारतीय क्रिकेट को जिन बुलंदियों तक पंहुचाया हैं वहां तक हर टीम पहुंचना चाहती है.2007 में टी-20 वर्ल्ड कप जीताना हो,चाहे 2011 में टीम को विश्व चैंपियन बनाना या इस साल चैंपियस ट्रॉफी जिताना धोनी ने टीम की झोली खिताबों से भर दी. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सारे खिताब केवल किस्मत के भरोसे मिले ? मुझे ऐसा बिलकुल भी नहीं लगता .केवल किस्मत के दम पर बार-बार आपको कोई जीत नहीं दिला सकता,हां साहस के बलबूते ऐसा मुमकिन जरूर है और इतना साहसी खिलाड़ी सिर्फ धोनी है. 2007 टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल का आखिरी ओवर जोगिंदर शर्मा से करवाना हो चाहे वेस्टइंडीज़ ट्राई सिरीज़ में रोहित शर्मा से ओपिनिंग करवाना हो धोनी ने हमेशा ही साहसी फैसले लिए.उनके ये फैसले सही साबित भी हुए.जिस खिलाड़ी पर उन्होने भरोसा जताया उसने अपने को प्रूव भी किया.शायद आज से 2-3 साल पहले किसी ने सोचा भी न रहा होगी कि सचिन,द्रविड़,लक्ष्मण,सहवाग,गम्भीर के बिना टीम इंडिया लगातार जीतेगी.लेकिन टीम जीत रही है.इस जीत के सूत्रधार भी धोनी ही हैं. एक ऐसा कप्तान जो कि खिलाड़ियो को सही तरह से यूटीलाइज़ करता है.टीम को न तो अब पांचवे गेंदबाज की कमी महसूस होती है और न ही किसी मैच फिनीशर की. टीम के पास खुद कप्तान धोनी के रूप में सबसे बड़ा मैच फिनिशर है जो अपने बलबूते मैच का रूख बदल देता है.धोनी न सिर्फ टीम के मुखिया हैं बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए इंस्पिरेशन भी . इसके बावजूद भी अगर कोई कहे कि धोनी ने ये मुकाम केवल अच्छी किस्मत के बलबूते पाया है तो ये बात बिल्कुल भी हजम नहीं होती.धोनी ने सब कुछ अपने दम पे पाया है.अपनी सफलता की पठकथा भी उन्होने अपने साहस और हौसले के दम पर ही लिखी है.
Friday, 31 May 2013
जो पकड़ा गया वो चोर ...बाकी सब ...??
ऐसा लग रहा है कि मानो सब कुछ
फिक्स है किक्रेट में ..खासतौर से आई.पी.एल में .बैट्समैन का शाटॅ मारना फिक्स
है,बालॅर का विकेट लेना फिक्स है..फील्डर से कैच छूट जाना फिक्स है,अंपायर का
उंगली न उठाना भी फिक्स है..खुरपेची दिमाग तो ये तक बोल रहा है कि साला मैच ही फिक्स है..लेकिन
तमीज़दार दिल अभी भी कह रहा कि गुरू सब कुछ फिक्स नहीं हो सकता.किक्रट भले ही अब
भद्रजनों का खेल न रहा हो लेकिन अभी भी इस में क्रिकेट का भगवान खेलता है,क्रिकेट
का सबसे बड़ा जेंटलमेन (द्रविड़) खेलता है,सबसे बड़ा मैच विनर(धोनी) खेलता है.
खुरपेची दिमाग फिर से अपनी अकल लगा रहा है और कह रहा है कि ये सब महान
खिलाड़ी फिक्सिंग मामले के बारे में जानते तो होंगे ही, सब जानते हुए भी कोई कुछ
बोल क्यों नही रहा.क्यों चुप है क्रिकेट का भगवान ,क्यों कुछ नहीं बता रहे भारतीय
कप्तान.सवाल तो ये भी है कि क्या सिर्फ श्रीशांत ,चंडीला और चौहान ही थे फिक्सिंग
में शामिल .क्या बाकी सब ईमानदार हैं,या इन पर किसी का आर्शिवाद है ? अगर फिक्सिंग में टीम के मालिक और दूसरे खिलाड़ी
भी शामिल हैं तो सज़ा केवल श्रीशांत ,चंडीला और चौहान ही क्यों भुगतें.लेकिन बात
तो ये ही है कि आज के ज़माने में जो पकड़ा जाए वो चोर और जो बच जाए वो..........खुद
ही डिसाईड कर लीजीए..
Wednesday, 20 February 2013
Friday, 20 April 2012
Friday, 9 March 2012
द्रविड़ तुझे सलाम ...
क्रिकेट के महानतम खिलाड़ियों में से एक और भारतीय क्रिकेट की दीवार राहुल द्रविड़ ने आज अंतर्राष्ट्रीय एवं घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। 16 साल पहले जब राहुल द्रविड़ ने अपने करियर की शुरुआत की थी तो शायद किसी ने सोचा न होगा कि वो एक दिन भारतीय बैटिंग ऑर्डर् की जान बन जाएंगे.वनडे करियर के शुरुआत में ही उनकी बैटिंग पर सवाल उठे थे लेकिन बहुत जल्द ही द्रविड़ नें अपने आलोचकों को अपना प्रशंसक बना लिया.उन्होनें हमेशा टीम की ज़रूरतों के हिसाब से बल्लेबाजी की.टीम के लिए द्रविड़ नें विकेटकीपरिंग भी की .क्रिकेट के कई जानकारों नें द्रविड़ की तकनीक को सबसे बेहतरीन माना.उनकी बेहतरीन तकनीक नें उन्हें टीम इंडिया की ‘दीवार’ बना दिया.
द्रविड़ के संन्यास के साथ ही भारतीय क्रिकेट के एक युग का समापन हो गया . 16 साल के अपने बेहतरीन करियर में भारतीय क्रिकेट को नयी ऊंचाइयां और बल्लेबाजी को नयी परिभाषा देने वाले द्रविड़ ने अपने संन्यास की घोषणा करते हुए कहा, मुझे बड़े दुख के साथ यह फैसला करना पड़ा है, लेकिन साथ ही मुझे गर्व है कि मैं इतने लंबे समय तक भारतीय टीम के लिए खेला। द्रविड़ ने कहा कि उन्होंने हमेशा क्रिकेट की खेल भावना को बरकरार रखने की कोशिश की है। द्रविड़ न सिर्फ एक बेहतरीन क्रिकेटर हैं बल्की एक अच्छे इंसान भी हैं.भद्रजनों के इस खेल में अब यह भद्रजन टीम इंडिया की जर्सी में मैदान में नहीं दिखेगा लेकिन खेल प्रेमियों के दिल में हमेशा बसा रहेगा.
अपने वोट की ताकत समझिए
विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों की तैयारियाँ जोर शोर पर हैं.सभी उम्मीद लगाए बैठी हैं कि इस बार वो जीतेंगे लेकिन जीत हार तो जनता तय करती है.पिछले कई वर्षों से हमारा प्रदेश महंगाई,भ्रष्टाचार,जुर्म जैसी कई समस्याओं से जूझ रहा है.यही कारण है कि अन्ऩा को भारी जनसर्मथन मिला.अन्ना का आंदोलन आम आदमी का आंदोलन बन गया.
आम आदमी अगर एकजुट हो जाए तो कुछ भी कर सकता है.जब जनता सड़को पर उतरती है तो सबकी शामत आती है.जन आक्रोष दिनों दिन बढ़ता जा रहा है.हर एक नेता को जनता की ताकत का एहसास है,लेकिन जनता को अपनी ताकत को समझना पड़ेगा.हम सब वोट डालने जाएंगे तभी ऐसी सरकार चुनी जाएगी जिसका सब सम्मान करेंगे.पिछले चुनाव में वोटिंग परसेंटेज काफी कम था.सिर्फ 40 से 45 परसेंट वोट से सरकार चुन ली जाती है और बाद में उसी सरकार का विरोध होता है.इसमें हमारी ही गलती है, जब आधे लोग वोट नहीं डालते तो बाद में विरोध करने का फायदा क्या .
(article written on 2nd february)
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