हर साल कुछ खास यादें छोड़ कर जाता है और नया साल नयी उम्मीदें लेकर आता है.यह साल बहुत खास था ,ज़िंदगी के कई उतार चढ़ाव देखने को मिले.कई खास लोगों से मिलने का मौका मिला तो कुछ खास लोगों ने अलविदा भी कहा.कई चहेरों को बदलते हुए देखा तो कुछ को सुधरते हुए भी देखा.कोई बिन बताए चला गया तो कोई बिन समझे.कुछ मुकाम हासिल किए लेकिन कई हासिल करने हैं अभी..मंज़िले अभी दूर हैं,रास्ते कठोर हैं लेकिन साथ में उम्मीद की डोर है ..मैं दुआ करता हूँ आने वाला वर्ष सबके लिए मंगलमय हो......
Saturday, 31 December 2011
Thursday, 24 November 2011
Tuesday, 25 October 2011
याद रहेगी 18 अक्टूबर की शाम ....
18 अक्टूबर की शाम शायद मुझे हमेशा याद रहेगी.. इस दिन टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल जनसभा को संबोधित करने आ रहे थे.अरविंद जी के लिए मेरे दिल में हमेशा से बहुत इज्ज़त रही है.मेरी नज़र में वह आज के युवाओं के रोल माडल हैं.जैसे ही मुझे पता चला कि अरविंद जी लखनऊ में झूलेलाल पार्क शाम 6 बजे आ रहे हैं मैं समय से कुछ पहले अपने दोस्त के साथ वहाँ पहुँच गया.वहाँ पहुँचते ही हमने स्टेज पे मनीश सिसोदिया और कुमार विश्वास को देखा.इंतज़ार था अब अरविंद जी के आने का.
थोड़ी देर बाद अरविंद जी के आने की खबर मिली.उन्हें देखने के लिए गेट पर ही भीड़ जुट गयी.मैं भी वहाँ पहुँच गया .लेकिन मेरी आखों के सामने अचानक एक ऐसी घटना घटी जिससे वहाँ हड़कंप मच गया. अरविंद जी जैसे ही स्टेज की तरफ बढ़े उन पर एक शख्स ने चप्पल फेकी.उसका निशाना तो चूक गया लेकिन वहाँ मौजूद कुछ युवओं ने उस व्यक्ति को पकड़ लिया और पीटने लगे.तभी पुलिस और मीडिया भी वहाँ पहुँच गया और फिर शुरू हो गया ‘पीपली लाइव’.. लोग उसको पीटने कोशिश कर रहे थे,पुलिस उसे बचाने की और मीडिया उसकी बाइट लेने की.उस दिन वो नज़ारा लाइव देखा जो अभी तक टीवी पर देखा करता था. विज़ुअल्स और बाइट लेने की अफरा-तफरी पीपली लाइव’ फिल्म की याद दिला रहे थे. विज़ुअल्स की शेयरिंग,ओबी वैन की उपयोगिता,फोनो,पीटीसी आदि मीडिया से संबन्धित कई चीजें देंखी.
करप्शन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे व्यक्ति पर अदब और तहज़ीब वाले शहर में फेंकी गयी चप्पल ने किसी को शर्मसार किया,किसी को टी.आर.पी दिलवाई तो किसी को गाली खिलवाई. लेकिन वहाँ मौजूद लोग आने वाले कई दिनों तक ये वाक्या नहीं भूल पाएंगे.....
Thursday, 13 October 2011
Wednesday, 14 September 2011
Monday, 12 September 2011
Saturday, 3 September 2011
दिल ......
सुनने में तो शायद बहुत छोटा वर्ड है 'दिल' पर ये हमारी लाइफ का बहुत इंम्पोरटेन्ट वर्ड है.दिल के बिना तो लाइफ इंम्पौसिबल ही है.दिल ऐसा वर्ड है जिसका यूज़ लगभग हर जगह ही होता है.कोई पेप्सी पीने के लिए कहता के 'दिल मांगे मोर' तो कोई चॅाकलेट पाने के लिए कहता है कि 'दिल है कि मानता नहीं'.फिल्मों और गानों का तो दिल से अटूट रिश्ता है.फिल्मों में कभी सुनने को मिलता है -'दिल तो बच्चा है' तो कभी 'दिल तो पागल है'.हमारे आमिर खान तो दिल को इडियट भी बोलते हैं.
अपने दिल को भले ही किसी ने देखा न हो लेकिन आशिक तो दिल चुराने और दिल के लेन-देन की बातें किया करते हैं.दिल के साइज़ के बारे मे पता न हो लेकिन अपनी गर्लफ्रेन्ड को दिल में बसाने की तमन्ना हर आशिक रखता है.दिल तोड़ने और जोड़ने की बातें भी खूब चला करती हैं जैसे दिल कोई बॅाडी पार्ट नहीं कोई खिलौना हो.कुछ लोग कहते हैं कि खूबसूरत वो है जिसका दिल साफ है हांलांकि दिल को साफ करने का कोई क्लीनर मार्केट में अभी नहीं आया.
कोई कहता है दिल से गाओ तो कोई बोलता है दिल की सुनो.मैं ये ही कहुंगा ..'दिल' तो है एक लेकिन इसकी परिभाषाएं हैं अनेख....
अपने दिल को भले ही किसी ने देखा न हो लेकिन आशिक तो दिल चुराने और दिल के लेन-देन की बातें किया करते हैं.दिल के साइज़ के बारे मे पता न हो लेकिन अपनी गर्लफ्रेन्ड को दिल में बसाने की तमन्ना हर आशिक रखता है.दिल तोड़ने और जोड़ने की बातें भी खूब चला करती हैं जैसे दिल कोई बॅाडी पार्ट नहीं कोई खिलौना हो.कुछ लोग कहते हैं कि खूबसूरत वो है जिसका दिल साफ है हांलांकि दिल को साफ करने का कोई क्लीनर मार्केट में अभी नहीं आया.
कोई कहता है दिल से गाओ तो कोई बोलता है दिल की सुनो.मैं ये ही कहुंगा ..'दिल' तो है एक लेकिन इसकी परिभाषाएं हैं अनेख....
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