Saturday, 3 September 2011

दिल ......

सुनने में तो शायद बहुत छोटा वर्ड है 'दिल' पर ये हमारी लाइफ का बहुत इंम्पोरटेन्ट वर्ड है.दिल के बिना तो लाइफ इंम्पौसिबल ही है.दिल ऐसा वर्ड है जिसका यूज़ लगभग हर जगह ही होता है.कोई पेप्सी पीने के लिए कहता के 'दिल मांगे मोर' तो कोई चॅाकलेट पाने के लिए कहता है कि 'दिल है कि मानता नहीं'.फिल्मों और गानों का तो दिल से अटूट रिश्ता है.फिल्मों में कभी सुनने को मिलता है -'दिल तो बच्चा है' तो कभी 'दिल तो पागल है'.हमारे आमिर खान तो दिल को इडियट भी बोलते हैं.

   अपने दिल को भले ही किसी ने देखा न हो  लेकिन आशिक तो दिल चुराने और दिल के लेन-देन की बातें किया करते हैं.दिल के साइज़ के बारे  मे पता न हो लेकिन अपनी गर्लफ्रेन्ड को दिल में बसाने की तमन्ना हर आशिक रखता है.दिल तोड़ने और जोड़ने की बातें भी खूब  चला करती हैं जैसे दिल कोई बॅाडी पार्ट नहीं कोई खिलौना हो.कुछ लोग कहते हैं कि खूबसूरत  वो है जिसका दिल साफ  है हांलांकि दिल को साफ करने का कोई क्लीनर मार्केट में अभी नहीं आया.

  कोई कहता है दिल से गाओ तो कोई बोलता है दिल की सुनो.मैं ये ही कहुंगा ..'दिल' तो है एक लेकिन इसकी परिभाषाएं हैं अनेख....



Sunday, 14 August 2011

इंतज़ार 16 अगस्त का.....

15 अगस्त  को देश आज़ादी की 64वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है लेकिन इस बार लोगो को इंतज़ार है 16 अगस्त का क्योंकि 16 अगस्त से शु्रू होगी 'आज़ादी की दूसरी लड़ाई' .ये लड़ाई है 'भ्रष्टाचार से आज़ादी की'.अन्ना की टीम तैयार है फिर से अंशन के  लिए तो दूसरी तरफ सरकार  इस जन-आंदोलन को दबाने की हर संभव कोशिश कर सकती है.मीडिया की मदद से अब लगभग हर भारतीय करप्शन के खिलाफ जागरुक हो रहा है.इस आंदोलन को भारी जन-समर्थन मिलने की उम्मीद है लेकिन क्या सरकार अन्ना के अन्शन के आगे झुकेगी..? अब इंतज़ार 16 अगस्त का है......